Sanskrit Slokas with Meaning in Hindi and English

Sanskrit Slokas with Meaning in Hindi and English

Sanskrit Slokas with Meaning in Hindi and English

संस्कृत के श्लोक में अपार ज्ञान छुपा होता है ये श्लोक हमें जीवन जीने का तरीका सिखाते हैं हमारे मार्गदर्शन में सहायक होते हैं यहाँ संस्कृत के श्लोक और उनका अर्थ हिन्दी और अंग्रेजी Sanskrit Slokas with Meaning in Hindi and English में दिया गया है आप इन श्लोकों को पढ़िए और अपने जीवन में लागू करें इनका आपके जीवन में सकारात्मक प्रभाव दिखेगा। sanskrit shlok on vidhya

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Sanskrit Slokas with Meaning in Hindi and English

Shlok 1

विद्यां ददाति विनयं विनयाद् याति पात्रताम्।
पात्रत्वात् धनमाप्नोति धनात् धर्मं ततः सुखम्।।

भावार्थ: विद्या से विनय अर्थात विवेक व नम्रता मिलती है, विनय से मनुष्य को पात्रता मिलती है यानी पद की योग्यता मिलती है। वहीं, पात्रता व्यक्ति को धन देती है। धन फिर धर्म की ओर व्यक्ति को बढ़ाता और धर्म से सुख मिलता है। इस मतलब यह हुआ कि जीवन में कुछ भी हासिल करने के लिए विद्या ही मूल आधार है।

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Meaning: Vidya gives modesty, that is, wisdom and humility, by modesty one gets eligibility, that is, one gets the qualification for the position. Entitlement gives money to the person. Money then moves the person towards religion and religion gives happiness. This means that knowledge is the basis for achieving anything in life.

Shlok 2

प्रथमे नार्जिता विद्या द्वितीये नार्जितं धनम् ।
तृतीये नार्जितं पुण्यं चतुर्थे किं करिष्यसि ॥

भावार्थ: जिस मनुष्य ने पहले आश्रम ( ब्रह्मचर्य ) में विद्या नहीं अर्जित किया , दूसरे आश्रम ( गृहस्थ ) में धन नहीं अर्जित किया , तीसरे आश्रम ( वानप्रस्थ ) में पुण्य नहीं अर्जित किया वह मनुष्य चौथे आश्रम ( सन्यास ) में क्या अर्जित करेगा ?

Meaning: One who has not earned Vidya in the first Ashrama (Brahmacharya). One who has not earned wealth in second Ashrama (Grihastha). One who has not earned Punya in third Ashrama (Vaanprastha). What will he do in the forth Ashrama (Sanyasa) ? 

Shlok 3

धनानि भूमौ पशवश्च गोष्ठे भार्या गृहद्वारि जनः श्मशाने।
देहश्चितायां परलोकमार्गे कर्मोनुगो गच्छति जीव एकः॥

भावार्थ: धन भूमि पर, पशु गोष्ठ में, पत्नी घर में, संबन्धी श्मशान में, और शरीर चिता पर रह जाता है। केवल कर्म ही है जो परलोक के मार्ग पर साथ-साथ आता है।

Meaning: Wealth remains on the earth, cattle in the cow-shed, wife inside the house, the relatives at the crematorium, and the body on the pyre, but on the way to the other world, it is one’s actions (Karma) that alone follows.

Shlok 4

गुरुर ब्रह्मा गुरुर विष्णु गुरुर देवो महेश्वरः।
गुरुः साक्षात्परब्रह्मा तस्मै श्री गुरुवे नमः।।

भावार्थ: गुरु ही ब्रह्मा हैं, जो सृष्टि निर्माता की तरह परिवर्तन के चक्र को चलाते हैं। गुरु ही विष्णु अर्थात रक्षक हैं। गुरु ही शिव यानी विध्वंसक हैं, जो कष्टों से दूर कर मार्गदर्शन करते हैं। गुरु ही धरती पर साक्षात परम ब्रह्मा के रूप में अवतरित हैं। इसलिए, गुरु को सादर प्रणाम।

Meaning: Guru is Brahma, who, like the creator of the universe, drives the cycle of change. Guru is Vishnu i.e. protector. Guru is Shiva i.e. the destroyer, who guides us away from sufferings. Guru himself has incarnated on earth in the form of Supreme Brahma. So, Regards to the Guru.

Shlok 5

अभिवादनशीलस्य नित्यं वृद्धोपसेविनं:।
चत्वारि तस्य वर्धन्ते आयुर्विद्या यशोबलं।।

भावार्थ: बड़े-बुजुर्गों का अभिवादन अर्थात नमस्कार करने वाले और बुजुर्गों की सेवा करने वालों की चार चीजें हमेशा बढ़ती हैं। ये चार चीजें हैं: आयु, विद्या, यश और बल। इसी वजह से हमेशा वृद्ध और स्वयं से बड़े लोगों की सेवा व सम्मान करना चाहिए।

Meaning: Greeting the elders, that is, those who do salutations and those who serve the elderly, four things always increase. These four things are: age, knowledge, fame and strength. For this reason, one should always serve and respect the elderly and elders.

Shlok 6

सुखार्थिनः कुतो विद्या नास्ति विद्यार्थिनः सुखम्।
सुखार्थी वा त्यजेद्विद्यां विद्यार्थी वा त्यजेत्सुखम्॥

भावार्थ: सुख चाहने वाले को विद्या छोड़ देनी चाहिए और विद्या चाहने वाले को सुख छोड़ देना चाहिए। क्योंकि सुख चाहने वाले को विद्या नहीं आ सकती और विद्या चाहने वाले को सुख कहाँ?

Meaning:Those who seek happiness should give up learning and those who seek knowledge should give up happiness. Because the one who seeks happiness cannot get knowledge and where is the happiness for the one who seeks knowledge?

Shlok 7

काक चेष्टा, बको ध्यानं, श्वान निद्रा तथैव च ।
अल्पहारी, गृहत्यागी, विद्यार्थी पंच लक्षणं ॥

भावार्थ: विद्यार्थी के पाँच लक्षण हैं- कौए की तरह चेष्टा (सब ओर दृष्टि और त्वरित निरीक्षण क्षमता), बगुले की तरह ध्यान, कुत्ते की तरह नींद (थोड़ा सा व्यवधान पर नींद खुल जाना ), अल्पहारी (कम भोजन करने वाला), गृहत्यागी (अपने घर और माता-पिता से दूर रहने वाला)।

Meaning: The five characteristics of a student are- crow-like effort (sight and quick observation ability), heron-like attention, dog-like sleep (wake up at the slightest disturbance), alpahari (short eater), grhatyagari (one’s own living away from home and parents).

Shlok 8

जरामृत्यू हि भूतानां खादितारौ वृकाविव ।
बलिनां दुर्बलानां च ह्रस्वानां महतामपि ॥

भावार्थ: बुढ़ापा और मृत्यु ये दोनों भेड़ियों के समान हैं जो बलवान, दुर्बल, छोटे और बड़े सभी प्राणियों को खा जाते हैं ।

Meaning: Old age and Death are the devourers of all creatures. Like wolves, they devour the strong and the weak, the small and the big. Everything.​

Shlok 9

अयं निजः परो वेति गणना लघुचेतसाम्।
उदारचरितानां तु वसुधैव कुटुम्बकम्।।

भावार्थ: छोटे चित यानी छोटे मन वाले लोग हमेशा यही गिनते रहते हैं कि यह मेरा है, वह उसका है, लेकिन उदारचित अर्थात बड़े मन वाले लोग संपूर्ण धरती को अपने परिवार के समान मानते हैं।

Meaning: Small minded people always keep counting that it is mine, it belongs to them, but liberal minded people consider the whole earth as their family.

Shlok 10

न चोरहार्य न राजहार्य न भ्रतृभाज्यं न च भारकारि।
व्यये कृते वर्धति एव नित्यं विद्याधनं सर्वधनप्रधानम्।।

भावार्थ: जिसे न चोर चुराकर ले जा सकता है, न ही राजा छीन सकता है, जिसका न भाइयों में बंटवार हो सकता है, जिसे न संभालना मुश्किल व भारी होता है और जो अधिक खर्च करने पर बढ़ता है, वो विद्या है। यह सभी धनों में से सर्वश्रेष्ठ धन है।

Meaning: A wealth which neither a thief can steal away, nor a king can snatch, which cannot be divided among brothers, which is difficult and heavy not to handle, and which increases on spending more, that is Vidya. . It is the best of all wealth.

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