Shayari on nature in hindi – प्रकृति पर शायरी

Shayari on nature in hindi – प्रकृति पर शायरी

Shayari on nature in hindi

हमारी धरती पर सबसे अच्छा कोई सौन्दर्य है तो वह है प्राकृतिक सौन्दर्य और जहां सौन्दर्य हो और उस पर शायरी न हो ऐसा हो ही नहीं सकता यहाँ प्रकृति पर शायरी shayari on nature in hindi का बेहतरीन कलेक्शन दिया गया है। तो आप भी प्रकृति पर शायरी को पढ़कर आनंद उठाइए।

Shayari on nature in hindi – प्रकृति पर शायरी

सुन्दर रूप इस धरा का,

आँचल जिसका नीला आकाश,

पर्वत जिसका ऊँचा मस्तक,2

उस पर चाँद सूरज की बिंदियों का ताज

डी. के. निवतियाँ 
धरती गगन हवा पवन ये सब प्रकृति के फूल हैं,
इनके एहसास ही गुलों की खुशबू और गुलशन का उसूल हैं

फिज़ा के रंग सभी अभी बरकार हैं;
जो पहुँच के पार है, वहीं पर बहार है.
कुछ ठहरा सा दिखता है; कुछ गहरा सा दिखता है;
किसी पाक़ नज़र या कुदरत का यहाँ पहरा सा दिखता है.
इंतजार है एक तेरा… कश्ती पर सवार हो…
समंदर की मस्ती भरी लहरों पर चलें…
सुनो अब चलें उस नीले गगन के तले…
बारिश की बूंदें चुपके से कह रही है…
कितना भी ऊँचा उठ जाओ तुम…
पर आना तो तुम्हें जमीन पर ही है…
बादलों के साये में, पर्वतों की बाँहों में;
राहतें यही बसती हैं झील की पनाहों में.
लाली है, चारो ओर हरियाली है,
रूप बहारो वाली यह प्रकृति,
मुझको जग से प्यारी है।
प्रकृति की लीला सबसे न्यारी,
कहीं बरसता पानी, तो कही बहता पानी
कहीं दहाड़ता समंदर है,
तो कहीं शांत सरोवर है।
आज अम्बर में बादल छाए है,
बारिश के कुछ आसार लग रहे हैं,
हो जाए तो बहुत अच्छा है,
वरना पंखे कूलर भी अब अंगार लग रहे हैं…
धरती गगन हवा पवन ये सब प्रकृति के फूल हैं,
इनके एहसास ही गुलों की खुशबू और गुलशन का उसूल हैं…
ऐ सावन तू क्यों इतनी बेरुखी कर रहा हैं,
ना वो समझती बारिश, ना कोई ख़ुशी दे रहा हैं,
क्या तेरी बदली तुझसे खफ़ा हो गयी
या तू कही और दिल्लगी कर रहा हैं…
नीचे गिरे सूखे पत्तों पर अदब से चलना जरा,
कभी कड़ी धूप में तुमने इनसे ही पनाह मांगी थी…
क़ुदरत एक शायरी है जिसे ख़ुदा रोज़ लिखता हैं,
क़ुदरत एक आशिकी है जिसमें खुदाई का एहसास पलता हैं…
फूलों से तुम हँसना सीखो,
भंवरों से तुम गाना,
दरखत की डाली से सीखों,
फल आये तो झुक जाना…
सुहाना मौसम, हवा का तराना,
खुशरंग है प्रकृति का हर नजारा।
पर्वत से सीखो गर्व से शीश उठाना,
सागर से सीखो जी भरकर लहराना,
प्रकृति नहीं सिखाती किसी को ठुकराना,
इसे बस आता है सबको अपनाना।
भोर की सुनहरी किरणों संग…
प्रकृति की सुन्दरता भव्य निराली है…
देखो मिलकर पेड़ों से किस तरह…
मस्ती में इठलाती डाली डाली है…

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